E waste is becoming a threat to health
E-waste : सेहत के लिए खतरा बन रहा है ई-कचरा
कोरोना वायरस से बचाव को लेकर पूरे देश में चलाये जा रहे सफाई अभियान की तरह ही बेकार और खराब हो चुके इलेक्ट्राॅनिक सामान का सुरक्षित निपटान बहुत जरूरी है क्योंकि इनमें मौजूद रसायन फेफड़े, किडनी, लीवर, हृदय, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे कचरे में पारा, सीसा, कैडमियम, आर्सेनिक और बेरिलियम जैसे विषाक्त पदार्थ होते हैं जो कई गंभीर बीमारियां पैदा करते हैं। बेकार हो चुके कंप्यूटर के माॅनीटर, मदरबोर्ड, लैपटॉप, टीवी, रेडियो और रेफ्रिजरेटर, कैथोड रे ट्यूब (सीआरटी), प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी), मोबाइल फोन और चार्जर, कॉम्पैक्ट डिस्क, हेडफोन के साथ एलसीडी या प्लाज्मा टीवी, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर जैसे इलेक्ट्राॅनिक उपकरणों को ई-कचरा या इलेक्ट्राॅनिक कचरा कहा जाता है और इनका सही तरीके से निबटान नहीं होने पर आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो सकता हैं।
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