High-tech courts due to virtual hearing of important cases
लॉकडाउन के चलते अब जरुरी मामलों की सुनवाई वर्चुअल कोर्ट में होगी
वीडियो कॉनफ्रेंसिंग की मदद से की जाएगी जरुरी मामलों की सुनवाई
बैंडविड्थ की उपलब्धता और डेडिकेटेड सर्वरों पर होस्टिंग प्रोसिडिंग के आंकलन के बाद लिया गया फैसला
नई दिल्ली, 05 अप्रैल (एजेंसी)। 21 दिन के लॉकडाउन का असर अब कोर्ट के कामकाज पर भी दिखने लगा है। ऐसे में देशभर की कोर्ट के जरुरी मामलों पर पड़ने वाले असर को कम करने हेतु सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने वर्चुअल कोर्ट खोलने की घोषणा की है। सूत्रों के अनुसार वर्चुअल कोर्ट में मात्र जरूरी मामलों की सुनवाई ही होगी जिसके चलते वादियों और वकीलों को कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग भी दी जाएगी। इतना ही नहीं कोर्ट सामान्य स्थिति लौटने के बाद भी इसी तरह कार्य करती रहेंगी।
वीडियो कॉनफ्रेंसिंग की मदद से की जाएगी जरुरी मामलों की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार दोपहर को देश के 23 उच्च न्यायालयों की ई-समितियों के प्रमुख न्यायाधीशों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। जिसके बाद यह निर्णय लिया गया कि ट्रायल कोर्ट सहित देश की सभी अदालतों में ई-फाइलिंग की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। इन अदालतों में वीडियो कॉनफ्रेंसिंग की सहायता से जरूरी मामलों को सुना जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि इस कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग संबंधित कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी जिससे वादी और वकील देख सकेंगे। वीडियो उपलब्ध कराने के पीछे यह भी तर्क दिया जा रहा है कि कोर्ट तत्काल कार्यवाही की प्रभावशीलता को भी बताना चाहती है।
#BIGBREAKING
#Delhi - सुप्रीम कोर्ट में लॉकडाउन नहीं होगा, सुप्रीम कोर्ट कल से वर्चुअल कोर्ट चलाएगा, 3 बेंच सिर्फ जरूरी मामलों की सुनवाई करेंगी
, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कल से होगी बहस। #Lockdown21
See Nभारत MEDIA's other Tweets
बैंडविड्थ की उपलब्धता और डेडिकेटेड सर्वरों पर होस्टिंग प्रोसिडिंग के आंकलन के बाद लिया गया फैसला
सुप्रीम कोर्ट के एक अधिकारी के अनुसार, पर्याप्त बैंडविड्थ की उपलब्धता और डेडिकेटेड सर्वरों पर होस्टिंग प्रोसिडिंग का आंकलन करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि अदालत की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग सुनवाई के अगले दिन तक वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। इस बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 6 के अनुरूप ई-फाइलिंग को लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके द्वारा सरकारी अधिकारी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का उपयोग करके सभी लेनदेन वैध (लीगल) बनाते हैं। जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का मूल्य भी कागजी रिकॉर्ड के बराबर हो जाता है।


Comments
Post a Comment