According to Oxfam's statement, the future of 500 million people is likely to be bleak

According to Oxfam's statement, the future of 500 million people is likely to be bleak


  • 50 करोड़ लोगों को झेलनी पड़ सकती है गरीबी की मार
  • 1990 के बाद वैश्विक गरीबी का दौर आने की सम्भावना
  • पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में गरीबी का सैलाब आ सकता है
  • अमीर और गरीब दोनों तरह के देशों पर इसका असर
लंदन, 09 अप्रैल (एजेंसी)। ऑक्सफैम ने जताया कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर कोरोना वायरस का सीधा असर देखने को मिल रहा है, जिसके चलते लगभग 50 करोड़ लोगों गरीबी का शिकार हो सकते है। आकड़ो के अनुसार अब तक इस महामारी के चलते पूरे विश्व में  83,000 से अधिक मौतें हो चुकी है। वहीँ अगले सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी कि आईएमएफ/विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले चैरिटी संस्था द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में आने वाले दिनों में कोरोना वायरस संकट के प्रभाव का घरेलू आय और खपत में कमी के कारण वैश्विक गरीबी का अनुमान लगाया गया है।

1990 के बाद वैश्विक गरीबी का दौर आने की सम्भावना

रिपोर्ट का अनुमान लगाया गया है कि कोरोना वायरस के कारण 1990 के बाद पहली बार वैश्विक गरीबी बढ़ सकती है। यह कुछ देशों को गरीबी के उसी स्तर पर वापस ला सकता है, जो तीन दशक पहले देखा गया था। रिपोर्ट के लेखकों ने विश्व बैंक की विभिन्न गरीबी रेखाओं जैसे प्रतिदिन 1.90 डॉलर या उससे कम पर अत्यधिक गरीबी से लेकर प्रतिदिन 5.50 डॉलर पर उच्च गरीबी रेखा को ध्यान में रखते हुए कई परिदृश्यों के माध्यम से अपने अनुमानों को सामने रखा है। सबसे गंभीर परिदृश्य के तहत आय में 20 फीसदी गिरावट होने से अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या दुनिया भर में 434 मिलियन से 922 मिलियन तक बढ़ जाएगी। इसी परिदृश्य में 5.50 डॉलर के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या 548 मिलियन से 4 अरब तक बढ़ेगी।

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